PT USHA Biography in Hindi – 102 अंतर्राष्ट्रीय पदक और 1,000 से अधिक पुरस्कार जितने वाली।

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फ्लाइंग रानी, पय्योली एक्सप्रेस, गोल्डन गर्ल … उपनाम उतने ही अनगिनत हैं जितने 102 अंतर्राष्ट्रीय पदक और 1,000 से अधिक पुरस्कार उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर की बैठकों में अर्जित किए हैं। लेकिन पिलावुल्लाकांडी ठेकेपरम्बिल उषा सिर्फ एथलेटिक्स की दुनिया में चैंपियन नहीं हैं। इस खेल के दिग्गज ने अतीत की बोझिल जीवन स्थितियों में बाधा डाली है, विनम्र शुरुआत, वित्तीय कठिनाइयों, अपर्याप्त सुविधाओं और बीमारियों पर काबू पाने के लिए ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे महान एथलीटों में से एक बन गया है। 16 साल की उम्र में, वह ओलंपिक में भाग लेने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय धावक बन गईं। वह 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ में चौथे स्थान पर रहीं, एक भारतीय महिला एथलीट द्वारा ट्रैक पर ओलंपिक पदक के सबसे करीब है! यही कारण है कि PT Usha की प्रेरक कहानी बताने योग्य है।

P T Usha Biography in hindi

क्रमांक जीवन परिचय बिंदु PT Usha जीवन परिचय
1. पूरा नाम पिलावुलकंडी थेक्केपारंबिल उषा
2. अन्य नाम पय्योली एक्सप्रेस, गोल्डन गर्ल
3. जन्म 27 जून, 1964
4. जन्म स्थान पय्योली, कोज्हिकोड़े, केरल
5. माता-पिता टी वी लक्ष्मी – इ पी एम् पैतल
6. पति वी श्रीनिवासन
7. बेटा उज्जवल
8. प्रोफेशन ट्रैक एवं फील्ड एथलीट
9. हाईट 5 फीट 7 इंच
10. धर्म हिन्दू

पिलावुलकंडी थेक्केपारंबिल उषा का जन्म 27 जून 1964 में पय्योली गाँव में हुआ था, इन्हें PT Usha नाम से ही जाना जाता है। इनके पिता का नाम इ पी एम् पैतल है, एवं माता का नाम टी वी लक्ष्मी। PT Usha का बचपन में बहुत स्वास्थ्य ख़राब था, लेकिन इन्होने अपने प्राइमरी स्कूल के दिनों में अपनी हेल्थ सुधार ली, और लोगों को इनके अंदर एक महान एथलीट की छवि दिखाई देने लगी। ( PT USHA Biography in Hindi )

1976 में केरल सरकार ने कन्नूर में एक महिला खेल सेंटर की शुरुवात की। 12 साल की PT Usha उन 40 महिलाओं में से थी, जिनका चयन यहाँ ट्रेनिंग के लिए हुआ था. इनके पहले कोच ओ.एम्. नम्बिअर थे। 1979 में PT Usha पहली बार लाइमलाइट में आई, जब उन्होंने नेशनल स्पोर्ट्स गेम्स में व्यक्तिगत चैम्पियनशिप जीती।

P T Usha अन्तराष्ट्रीय करियर (P T Usha international career) –

PT Usha ने एथलीट के तौर पर अपने अन्तराष्ट्रीय करियर की शुरुवात 1980 में करांची में हुए ‘पाकिस्तान ओपन नेशनल मीट’ से की थी. इस एथलीट मीट में PT Usha ने 4 गोल्ड मैडल भारत के नाम किये थे।  16 साल की इस छोटी सी लड़की ने भारत का सर, दुश्मन माने जाने वाले देश पाकिस्तान में बहुत ऊँचा कर दिया था।  इसके बाद 1982 में PT Usha ने ‘वर्ल्ड जूनियर इनविटेशन मीट’ में हिस्सा लिया, 200 मीटर की रेस में इन्होने गोल्ड मैडल एवं 100 मीटर की रेस में ब्रोंज मैडल जीता था।  लेकिन इसके एक साल बाद ही कुवैत में हुए ‘एशियन ट्रैक एंड फील्ड चैम्पियनशीप’ में पी टी उषा ने 400 मीटर की रेस में नया रिकॉर्ड कायम किया और गोल्ड मैडल जीता।

इसके बाद इन्होने अपनी परफॉरमेंस में और अधिक सुधार के लिए और प्रयास किया, और 1984 में होने वाले ओलंपिक की तैयारी जमकर करने लगी।  1984 में लॉसएंजिल्स में हुए ओलंपिक में PT Usha ने सेमी फाइनल के पहले राउंड की 400 मीटर बढ़ा दौड़ को अच्छे से समाप्त कर लिया, लेकिन इसके फाइनल में वे 1/100 मार्जिन ने हार गई, और उनको ब्रोंज मैडल नहीं मिल पाया। यह मैच बहुत रोमांच से भरा रहा, जिसने 1960 में ‘मिल्खा सिंह’ की एक रेस याद दिला दी थी. इस मैच का आखिरी समय ऐसा था, की लोग अपने दांतों तले उंगलियाँ चबा जाएँ। हार के बाद भी PT Usha की यह उपलब्धि बहुत बड़ी थी, यह भारत के इतिहास में पहली बार हुआ था, जब कोई महिला एथलीट ओलंपिक के किसी फाइनल राउंड में पहुंची थी. इन्होने 55.42 सेकंड में रेस पूरी की थी, जो आज भी भारत के इवेंट में एक नेशनल रिकॉर्ड है।

1985 में PT Usha ने इण्डोनेशिया के जकार्ता में ‘एशियन ट्रैक एंड फील्ड चैम्पियनशीप’ में हिस्सा लिया, जहाँ इन्होने 5 गोल्ड और 1 ब्रोंज मैडल जीता। 1986 में 10 वें ‘एशियन गेम्स’ जो सीओल में हुआ था, वहां 200 मीटर, 400 मीटर, 400 मीटर बाधा एवं 4*400 मीटर रिले रेस में हिस्सा लिया, जिसमें चारों में ही उषा जी विजयी रहीं और गोल्ड मैडल भारत के नाम कर दिया। एक ही इवेंट में एक ही एथलीट द्वारा इतने मैडल जीतना, अपने आप में एक रिकॉर्ड था, जिसे महान PT Usha ने अपने नाम कर लिया था।

1988 में सीओल में ओलंपिक गेम्स का आयोजन हुआ, जहाँ PT Usha को हिस्सा लेना था, लेकिन इसके ठीक पहला उनके पैर में चोट लग गई। लेकिन PT Usha के जज्बे को यह चोट भी नहीं रोक पाई, उन्होंने उसी हालत में अपने देश के लिए उस गेम्स में हिस्सा लिया। दुर्भाग्यवश वे इस गेम्स में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई और उन्हें एक भी जीत नहीं मिली।

PT Usha 1989 में अपनी परफॉरमेंस के उपर काम करके, जबरजस्त तैयारी के साथ दिल्ली में आयोजित ‘एशियन ट्रैक फेडरेशन मीट’ में गई, जहाँ उन्होंने 4 गोल्ड मैडल एवं 2 सिल्वर मैडल जीते। यह वह समय था, जब PT Usha अपने रिटायरमेंट की घोषणा करना चाहती थी, लेकिन सभी ने उन्हें अपनी एक आखिरी पारी खेलने के लिए बोला।  जिसके बाद इन्होने 1990 में ‘बीजिंग एशियन गेम्स’ में हिस्सा लिया। इस इवेंट के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होने के बावजूद PT Usha ने 3 सिल्वर मैडल अपने नाम किये।

पी टी उषा की वापसी (PT Usha comeback) –

1990 में बीजिंग में गेम्स खेलने के बाद PT Usha ने एथलेटिक्स से संन्यास ले लिया। 1991 में इन्होने वी श्रीनिवासन से शादी कर ली। जिसके बाद इनका एक बेटा हुआ। 1998 में अचानक सबको चौंकाते हुए, 34 साल की उम्र में PT Usha ने एथलेटिक्स में वापसी कर दी, और इन्होने जापान के फुकुओका में आयोजित ‘एशियन ट्रैक फेडरेशन मीट’ में हिस्सा लिया। इस गेम्स में PT Usha ने 200 मीटर एवं 400 मीटर की रेस में ब्रोंज मैडल जीता। 34 साल की उम्र में P T Usha ने 200 मीटर की रेस में अपनी खुद की टाइमिंग में सुधर किया और एक नया नेशनल रिकॉर्ड कायम कर दिया, जो ये दर्शाया था कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती और ये भी सबको पता चल गया कि एथलीट टैलेंट इनके अंदर कूट कूट कर भरा हुआ है। सन 2000 में फाइनली PT Usha जी ने एथलेटिक्स से संन्यास ले लिया। ( PT USHA Biography in Hindi )

पी टी उषा अवार्ड्स (Awards won by P T Usha) –

  • एथलेटिक्स के खेल के प्रति उनके प्रयास एवं उत्कृष्ट सेवा, साथ ही राष्ट्र का नाम ऊँचा करने के लिए P T Usha जी को 1984 में अर्जुन अवार्ड दिया गया।
  • 1985 में देश के चौथे बड़े सम्मान पद्मश्री से उषा जी को सम्मानित किया गया।
  • इसके अलावा इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने P T Usha जी को ‘स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ़ दी सेंचुरी’ एवं ‘स्पोर्ट्स वीमेन ऑफ़ दी मिलेनियम’ का ख़िताब दिया।
  • 1985 में जकार्ता में हुए ‘एशियन एथलीट मीट’ में उषा जी को उनके बेहतरीन खेल के लिए ‘ग्रेटेस्ट वीमेन एथलीट’ का ख़िताब दिया गया था। ( PT USHA Biography in Hindi )
  • बेस्ट एथलीट के लिए P T Usha जी को सन 1985 एवं 86 में ‘वर्ल्ड ट्रोफी’ से सम्मानित किया गया था।
  • 1986 के एशियन गेम्स के बाद ‘एडिडास गोल्डन शू अवार्ड फॉर दी बेस्ट एथलीट’ का ख़िताब दिया गया।
  • केरल खेल पत्रकार।

पी टी उषा उपलब्धि (PT Usha Achievements) –

  • 1977 में कोट्टयम में राज्य एथलीट बैठक में एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
  • 1980 में मास्को ओलंपिक में हिस्सा लिया।
  • पहली महिला एथलीट बनी जो ओलंपिक के फाइनल तक पहुंची।
  • 16 साल की उम्र में उषा जी ने 1980 के मास्को ओलंपिक में हिस्सा लिया था, जिसके बाद वे सबसे कम उम्र की भारतीय एथलीट बन गई थी।
  • लॉसएंजिल्स ओलंपिक में पहली बाद महिला एथलेटिक्स में 400 मीटर प्रतिस्पर्धा में बाधा दौड़ जोड़ी गई, जहाँ पी टी उषा जी ने 55.42 सेकंड का एक रिकॉर्ड बना दिया था. जो आज भी इंडियन नेशनल रिकॉर्ड है।
  • तीन ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी है। ( PT USHA Biography in Hindi )

आज PT Usha जी केरल में एथलीट स्कूल चलाती है, जहाँ वे यंग एथलीट को ट्रेनिंग दिया करती है। यहं उनके साथ टिंटू लुक्का भी वहां है, जो लन्दन 2012 के ओलंपिक में वीमेन सेमीफाइनल 800 मीटर की रेस को क्वालिफाइड कर चुकी है। PT Usha जी की प्रतिभा का समस्त देश वासी सम्मान करते है, साथ ही उनके अपने प्रोफेशन के प्रति जस्बे को सलाम करते है।

”Mera bharat mahan ,  I am proud to be an Indian.”


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