Ram Saran Das, Lala – Biography

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स्वतंत्रता

प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को, हम भारतीय पूरे जोश व उल्लास से स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। यही वह तारीख है, जब सन् 1947 में अंग्रेजी हुकूमत से हम सभी को आजादी मिली थी। इतिहास की एक ऐसी उज्ज्वल सुबह, जब भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों की कड़ी तपस्या रंग लाई थी। तब हर भारतीय के होठों पर गुंजायमान था, सिर्फ एक ही तराना- ‘अब हम आजाद हैं!’

पर हाँ, यह युग सत्य है कि इस आजादी को पाना आसान न था। इसके लिए स्वतंत्रता सेनानियों को शूलों से भरे लम्बे रास्तों पर नंगे पाँव चलना पड़ा था। बेइंतहां जुल्म और पीड़ा के दरिया को पूरी दिलेरी से पार करना पड़ा था। इस स्वतंत्रता के महासंग्राम में कई दिल दहला देने वाली घटनाएँ घटीं… जिनको सुनकर कभी नयन नम, तो कभी मस्तक गौरवांवित हो उठता है। तो पढ़ते हैं, वीर-रस से ओतप्रोत भारतीय सपूतों के कुछ ऐसे ही बलिदानों को! उन्ही क्रांतिकारियों में से एक Ram Saran Das, Lala आइये जानते है इनके बारे में ।

Ram Saran Das, Lala

उन्हें 1915 में पहले लाहौर षडयंत्र मामले में दोषी ठहराया गया था। वह अपनी रिहाई के बाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन/सेना में सक्रिय हो गए और उन्हें फिर से दोषी ठहराया गया। वह एक कवि थे और उन्होंने ड्रीमलैंड के शीर्षक के तहत एक कविता संग्रह लिखा था। उन्होंने Bhagat Singh से इसका परिचय लिखने को कहा, जो बाद में उन्होंने किया। उनके संस्मरण Malvinderjit Singh Waraich द्वारा संपादित पुस्तक, Revolutionaries in dialogue: Ram Saran Das, Lala और शहीद Bhagat Singh में प्रकाशित हुए हैं।


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