Silk Smitha की वो कहानी जो Vidya Balan भी नहीं बता पाईं फिल्म Dirty Picture में

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भारतीय सिनेमा ने ऐसा दौर भी देखा है जब तमाम हिंदी फिल्में सिर्फ इसके कॉमेडियन्स मसलन महमूद या जॉनी वाकर का नाम सुनकर वितरकों के बीच बिक जाया करती थीं। वहीं दक्षिण भारत में एक अभिनेत्री ऐसी रही जिसने अकेले अपने बूते न जाने कितनी फिल्मों की नैया पार लगा दी। नाम था Vijayalakshmi Vadlapati। लेकिन, Vijayalakshmi Vadlapati के चाहने वालों का सैलाब तब आया जब फिल्मों में इन्हें नाम मिला, Silk Smitha । 2 दिसंबर 1960 को जन्मी Silk ने मात्र 17 साल के अपने फिल्मी करियर में ही साढ़े चार सौ से ज्यादा फिल्मों में काम करके तहलका मचा दिया। 23 सितंबर 1996 में अपने घर में वह पंखे से लटकी हुई पाई गईं। Silk की जिंदगी पर वैसे तो तीन फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन इनमें जो कहानियां आपको देखने को नहीं मिली, वे हम सुनाएंगे।

silk smitha

तीन फिल्मफेयर जीतने वाली ये फिल्म श्रीदेवी और कमल हसन के करियर में मील का पत्थर कही जाती है. फिल्म देखने वाले लोगों को सोमू और रेश्मी के किरदार याद हैं, हो सकता है हरिप्रसाद भी याद हो. 80 के दशक में जब बालु महेंद्रा ‘सदमा’ जैसी फिल्म बनाते हैं तो श्रीदेवी और कमल हसन को अभिव्यक्ति का पूरा आकाश देने के बाद भी, Silk Smitha के लिए क्षितिज पर एक कोना ढूंढ ही लेते हैं. वो कोना जिसमें Silk Smitha की मांसल जांघेंं, उन्नत वक्ष और अलग से उभरती हुई गहरी क्लीवेज है. सोनी बनी Silk एक किरदार के तौर पर इस फिल्म की कहानी में कुछ भी जोड़ती घटाती नहीं हैं. भले दिल वाले हीरो को सिड्यूस करने की ‘फूहड़’ कोशिशें करती हैं. गंभीर सी कहानी के बीच में तमाम पुरुषों की दबी हुई फैंटेसी को पूरा करने में वही करती हैं जो उनसे करने की उम्मीद की जाती है. 1983 में जब ‘सदमा’ रिलीज़ हुई थी तो सिल्क 4 साल में 200 फिल्मों के साथ अपने करियर के टॉप पर थीं.

सिल्क स्मिता

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200 में से, न जाने कितनी फिल्मों को बंद डिब्बों में ‘Silk’ की फुटेज लगाकर बेच दिया गया. वे फिल्में जिन्हें भारतीय सिनेमा (सिर्फ हिंदी नहीं) की वर्ण व्यवस्था में B और C ग्रेड की जातियों में बांट दिया गया. जिस ग्रेड के तय होते ही तय हो जाता था कि समाज का कौन सा वर्ग इन्हें देखेगा और सराहेगा. रिक्शेवालों की फिल्में, ट्रकवालों के गाने, लफंगों का हेयर कट, न जाने ऐसे कितने स्टीरियोटाइप बने और बनाए गए. जिन स्टीरियोटाइप्स को पूरा करने में कभी Silk Smitha कभी हेलेन कभी ममता कुलकर्णी तो कभी जॉनी लीवर अलग-अलग से टाइप्ड होते रहे.

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Silk पर फिल्म बनती है.

Vidya Balan अपने करियर के सबसे रेशमी किरदार को निभाते-निभाते एक डायलॉग बोलती हैं, “फिल्में सिर्फ तीन चीजों से चलती हैं – एंटरटेनमेंट! एंटरटेनमेंट! एंटरटेनमेंट! और मैं एंटरटेनमेंट हूं.” इस डायलॉग को पूरी शिद्दत से बोलने के लिए Vidya की भरपूर तारीफ होती है, होनी भी चाहिए. मगर Silk, जिसने इस एंटरटेनमेंट को मौत तक जिया उसका क्या? जो न जाने कितनों की फैंटेसी की ट्यूनिंग करते-करते खुद अपनी ज़िंदगी से मिसट्यून हो गई. Silk के किरदार को निभाकर Vidya का क्लास बढ़ गया मगर silk की पहचान आज भी वे ही किरदार हैं जो बिंबो हैं, आइटम हैं, फूहड़ हास्य पैदा करने वाले हैं.

Silk की उत्तराधिकारी कही जाने वाली ‘B ग्रेड सॉफ्टकोर’ हिरोइन शकीला ने अपनी आत्मकथा में लिखा है (आप शकीला के आत्मकथा लिखने पर अब तक मन ही मन शक ज़ाहिर कर चुके होंगे) कि पहले स्क्रीन टेस्ट के समय स्कर्ट की लंबाई देखकर वो रोईं थी. स्टॉकिंग मांगे, ये भी तस्दीक की कहीं स्कर्ट गलत तो नहीं. मगर जल्द ही खुद को समझा लिया कि ये गलत स्कर्ट ही शकीला और silk जैसों की किस्मत है. शकीला ने स्मिता को अपने सामने की सबसे बेहतरीन एक्टर कहा है. वो हो भी सकती हैं क्योंकि जिस किरदार और अदाकार में दुनिया फर्क न कर पाए उसकी अदायगी में कुछ तो खास होगा ही.

silk smitha

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क्या दोष था पता नहीं

Silk की पैदाइश कब हुई, कब उसने दुनिया छोड़ दी इसको जानने में आपको अगर दिलचस्पी हो तो आप पता कर ही लेंगे. मगर आपको ये बताते-बताते इसे यहां बताना गैर-ज़रूरी समझने लगा हूं, मेरे दिमाग में ख्याल आ रहा है, silk गोरी चमड़ीवाले किसी फिरंगी मुल्क से आई होतीं तो शायद कम एक्टिंग के बावजूद किसी न किसी परिवार में ‘सेटल’ हो जातीं.

पता नहीं दोष उन माध्यमों को दिया जाए जो किसी Vijayalakshmi Vadlapati को Silk Smitha बनाकर एंटरटेनमेंट देते हैं या उन उपभोक्ताओं को जो अंग्रेज़ी शब्दों के साथ छपी कपूर सरनेम वाली लड़की की ब्रा-लेस फोटो को प्रोग्रेसिव मानते हैं और गांव या मिडिल क्लास से सीधे उठकर आई किसी के क्लीवेज को वल्गर. ऐसी तमाम सिल्क आती रहेंगी और जाती भी रहेंगी. हो सके तो अगली बार किसी सिल्क के बारे में जब राय बनानी हो तो ध्यान रहे कि वो सब एक किरदार निभा रहे हैं. वो किरदार जो आपको या हमें भी निभाना पड़ सकता था.


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